मेरी जिंदगी आज मै मेरे गुरु श्री मुकुल श्रीवास्तव जी की प्रेरणा से तुम्हे यह ख़त लिख रहा हू |
मै सौमित्र यह नाम मुझे मेरे माता पिता ने दिया और इसी के साथ तुम्हारे साथ मेरे सफ़र की शुरुआत हुई एक आम आदमी की तरह ही मैंने भी तुम्हे जीना शुरू किया और अभी तक मै एक आम ही आदमी हूँ |
जब भी मै इस जिंदगी के बार्रे में सोचना शुरू करता हू मुझे अपनी जिंदगी के अच्छे बुरे जो भी पल जिए मुझे याद आते है हर आम आदमी की तरह ही तुमसे मुझे जो भी मिला कभी मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया और कभी बहुत ख़ुशी भी हुई की मेरे साथ मेरे आस पास रहने वाले लोगो मेरे दोस्तों और मुझसे जुड़े और लोगो से मै कुछ ज्यादा पा रहा हूँ तुमसे मुझे तुमसे बहुत साडी शिकायते भी है तो बहुत सारी खुशिया जो तुमने मुझे दी उसके लिए मै तुम्हारा धन्यवाद भी देना चाहता हूँ आज तुम्हे ये पत्र लिख कर मै अपनी बीती हुई जिंदगी को तुम्हारे साथ एक बार फिर से जीना चाहता हूँ मै आज उस हर खूबशूरत लम्हे को एक बार फिर से जिन्दा करने की कोशिश करूँगा जो तुमने मुझे दिया और साथ हे आपनी उस हर गलती के बारे में भी थोडा सा सोचूंगा और कोशिश करूँगा उन सभी का हल निकलने की ताकि आने वाले मेरे भविष्य में मुझे दोबारा उन मुसीबतों का सामना न करना पड़ा जिनका मै अपने गुजरे हुए कल में कर चूका हू मै नहीं चाहता की दुबारा मुझे तुमसे कभी ये कहना पड़े की तुमने मुझे ये दिन फिर क्यों दिखाया |
मैंने अपने सफ़र की शुरुआत एक छोटे से शहर से की जहा मेरा बचपन बहुत ही मीठी यादो के साथ और कुछ कडवे पलो के साथ कटा| उम्र के एक बड़े हिस्से तक मुझे इस सफ़र के बारे में ज्यादा अहसास नहीं था बस बिना किसी फ़िक्र के मै तुम्हारा हाथ थाम कर आगे बढ़ रहा था तुम्हारे साथ साथ मेरे माता पिता ने भी मेरा हाथ बड़ी ही मजबूती के साथ थमा हुआ था जिस से जिंदगी के सफ़र का एक बड़ा हिस्सा कब ख़तम हुआ मुझे पता भी नहीं चला या मै जिंदगी का एक पड़ाव था जो एक आम आदमी की ही तरह मेरी जिंदगी में भी आया और ख़तम हो गया और जाते जाते मुझसे कह गया की यहाँ तक ke सफ़र में हमने तुम्हारे हर फैसले को तुम्हारे लिए सोचा और किया अब तुम्हारी बारी है अब आगे का सफ़र तुम्हे अकेले अपने आप से करना है हम साथ है हम तुम्हारे लिए सोचते है और हर कठिनाई में तुम्हारा मार्गदर्शन करेंगे मगर अब फैसले तुम्हे खुद लेने होंगे और अपने रास्ते भी तुम्हे खुद तय करने होंगे अब अपने हर फैसले के jimedar तुम खुद होगे ये vo vakt था जब मै अपने school के dino को पूरा कर चूका था और अपने garduation के लिए अपने छोटे शहर से निकल कर आँखों में ढेर saare sapne और purani याद लिए एक बड़े शहर में आ गया |
इस नए शहर में आने के पहले की सारी यादे आज भी मेरे जेहन में बसी हुई है और हमेशा यही लगता है की वो दिन आज के दिन से ज्यादा खूब्शुरुत थे |
मगर जिंदगी के सफ़र का ये हिस्सा ही असली सफ़र था जिसमे मै और सिर्फ मै था अपना हर दिन मुझे अपने हिस्साब से जीना था मेरी जिंदगी के सारे नियम कायदे सब मुझे बनाने थे शुरू में तो बहुत अच्छा लगा आजादी देख कर मगर जैसे जैसे सफ़र आगे बढा और रस्ते की मुशिकलो ने मुह उठाना शुरू किया तो महसूस होना शुरू हुआ जो सफ़र मै कर रहा हूँ वो नहीं बल्कि जो मै कर चूका हू वो ज्यादा अच्छा था वहा मेरी हर जरुरत और हर समस्या के लिए मेरे अपने सोचते थे मुझे रस्ते के किसी भी कांटे की परवाह नहीं करनी होती थी सबके लिए मेरे अपने मेरा साथ देते थे मै सिर्फ तुम्हे एन्जॉय कर रहा था मगर अब वक़्त बदल चूका था अब हर चीज़ के लिए मुझे खुद सोचना था यही से मेरी असली जिंदगी शुरू हुई इस सफ़र में भी मुझे बहुत से अपने और अगर दूसरी तरह से कहे तो हमसफ़र मिले जिन्हें ने बखूबी मेरा साथ दिया मगर उनमे से कोई भी ज्यादा दूर तक मेरे साथ नहीं चल सका और इसमें उनकी खता भी नहीं है हर सख्स का अपना अपना सफ़र है जो उसे तय करना है मै अपना कर रहा हूँ और उन्हें अपना करना है और मै अपना कर रहा हूँ इन साथियों के लिए मै दो लाइन कहना चाह्होंगा जो अक्सर मेरे जेहन में आती है
आंसू बन कर आंख पर आ भी नहीं सकता,गम क्या है समुन्दर को बता भी नहीं सकता;
तुम मेरा साथ छोड़ रहे हो इसमें तुम्हारी खता नहीं ,हर शख्स मेरा साथ निभा भी नहीं सकता |
वो सारे लोग जो इस पड़ाव पर मेरे साथ ए और चले गए मुझे हमेशा याद रहेंगे क्यूंकि उन्होंने हमेशा मुझे कुछ न कुछ दिया किसी ने मीठी यादे दी तो किसी ने सिखाने के लिए एक्स्पेरिंस दिए.
इस पूरे सफ़र मै कई बार उदास भी हुआ कई बार निराश भी कई बार ख़ुशी भी हुई और कभी गम से आंख भी भर आई
आज भी मै चल रहा हू और न जाने अभी मुझे कितना और चलना भी है मगर ऐ जिंदगी मेरा ये तुम से वादा है की जब तक तू मेरा दम्मान नहीं चोदगी मै भी रोज नयी उमंग और रोज़ नए जोश के साथ तुझसे सीखता हुआ आगे बढ़ता रहूँगा तेरे हर पल को जितना ज्यादा हो सकेगा जिऊंगा न निराश होऊंगा और न तुझे निराश करूँगा|
बस जो एक सच आज मै आज तक नहीं समझ पाया हूँ वो ये है की मै तुम्हे जी रहा हूँ या तुम मुझे ..........
इस पत्र को पढने के बाद तुम्हारे जेहन में एक बात जरुर आयेगी की इसमें कुछ अधूरा है मगर क्या करू अभी मै और मेरी जिंदगी दोनों अधूरे है......
आंसू बन कर आंख पर आ भी नहीं सकता,गम क्या है समुन्दर को बता भी नहीं सकता;
तुम मेरा साथ छोड़ रहे हो इसमें तुम्हारी खता नहीं ,हर शख्स मेरा साथ निभा भी नहीं सकता |
वो सारे लोग जो इस पड़ाव पर मेरे साथ ए और चले गए मुझे हमेशा याद रहेंगे क्यूंकि उन्होंने हमेशा मुझे कुछ न कुछ दिया किसी ने मीठी यादे दी तो किसी ने सिखाने के लिए एक्स्पेरिंस दिए.
इस पूरे सफ़र मै कई बार उदास भी हुआ कई बार निराश भी कई बार ख़ुशी भी हुई और कभी गम से आंख भी भर आई
आज भी मै चल रहा हू और न जाने अभी मुझे कितना और चलना भी है मगर ऐ जिंदगी मेरा ये तुम से वादा है की जब तक तू मेरा दम्मान नहीं चोदगी मै भी रोज नयी उमंग और रोज़ नए जोश के साथ तुझसे सीखता हुआ आगे बढ़ता रहूँगा तेरे हर पल को जितना ज्यादा हो सकेगा जिऊंगा न निराश होऊंगा और न तुझे निराश करूँगा|
बस जो एक सच आज मै आज तक नहीं समझ पाया हूँ वो ये है की मै तुम्हे जी रहा हूँ या तुम मुझे ..........
इस पत्र को पढने के बाद तुम्हारे जेहन में एक बात जरुर आयेगी की इसमें कुछ अधूरा है मगर क्या करू अभी मै और मेरी जिंदगी दोनों अधूरे है......