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Thursday, March 31, 2011

यादे साथ है तुम्हारी बस महसूस कर रहा हूँ |


तेरी यादो के साये में मै तुम्हे महसूस करता हूँ ,
अपने हर एक जर्रे में तुम्हे मै महसूस करता हूँ|
तुमको पाकर मैंने जिंदगी की हर ख़ुशी थी पा ली ,
और तुमसे दूर होकर हर ख़ुशी को दूर करता हूँ |

तुम साथ थे तो  जिंदगी का हर गम दूर था मुझसे ,
और अब तुम से दूर हू तो हर गम को महसूस करता हूँ |
तुम हम सफ़र थे तोह जिंदगी का हर रास्ता था हसी ,
तुम दूर हो तो कदमो से दूर है ये जमी |

तुम याद का साया बनकर साथ चलते हो ,
पर तुम दूर हो मुझसे तो दूर है हर ख़ुशी ,
हर आहात पर तुम को महसूस करता हूँ ,
पर हर सांस  तुम बिन बड़ी मुश्किल से चलती है |

जिंदगी तुम्हारे साथ थी तुम बिन भी चलती है ,
जब तुम साथ नहीं हो तो साँस भी रुक - रुक कर चलती है |
तुम साथ थे तो किस्मत भी मेरे साथ चलती थी ,
पर तुम बिन तो ये किस्मत भी मुझसे जुदा सी चलती है |

तुम साथ थे तो  रस्ते  भी साथ चलते थे ,
अब तुम बिन इन रास्तो को खुद से दूर महसूस करता हूँ |

Sunday, March 27, 2011

खोते रहस्यों से रूबरू कराती एक यात्रा :Hertiage walk

इमामबारा
हम सब ने लखनऊ  को देखा है हम सब इसके बारे में जानते है लखनऊ की कुछ चीज़े है जो पूरी दुनिया में मशहूर है पूरे विश्व से लोग लखनऊ आते है और यहाँ की तहजीब और नजाकत को महसूस करते है |
लखनऊ अब दो हिस्सों में है एक हिस्सा है नया लखनऊ जो आज के आधुनिक युग के साथ कदम से कदम मिलकर चल रहा है जिसे हर सख्स देखता है जहा जिंदगी दुनिया दुनिया की दौड़ में सबसे आगे निकलने के लिए भागती है जहा हर सख्स अपने पडोसी से मिलो आगे निकलने के लिए दौड़ में मसरूफ है और दूसरा है पुराना लखनऊ जो सदियों पुराणी कहानियो और तहजीब को अपनी तंग गलियों और पुराणी इमारतों में आज भी समेटे हुए है | ये इमारते बूढी हो चुकी है फिर भी अपने अन्दर पीढियों का इतिहास समेटे हुए शान से अपनी कहानी खुद कहती है |
इस लखनऊ को देखने का आप सब्सासन और अच्छा रास्ता उत्तर प्रदेश टूरिस्म की तरफ से मिलने वाली यात्रा Heritage  Walk  इस यात्रा के साथ न सिर्फ आप इसे देख सकते है साथ आप इसे महसूस कर सकते है इसे जी सकते है |
२६-मार्च-२०११ सुबह ८:०० बजे मैंने ये यात्रा अपने कुछ साथियों और हमारे गुइदे नावेद जिया जी ,इमरान हासमी जी और आतिफ जी के साथ की इस यात्रा के दौरान न सिर्फुन्होने हमें एतहासिक लखनऊ से रूबरो कराया साथ ही हमे इसे महसूस करने का मौका भी प्रदान किया |
हमारी यात्राशुरु हुई टीले वाली मस्जिद से ये मस्जिद लाल पूल (पक्के पुल )के सामने है इस मस्जिद की जो एतहासिक जानकारी उपलब्ध है उसके हिसाब से इस मस्जिद का निर्माण नवाब आसिफ अली ने १७७५ में करवाया था ये मस्जिद उस वक़्त सहर के सबसे ऊँचे टीले पर थी जिस वजह से इसे टीले वाली मस्जिद कहते है इस मस्जिद के अन्दर ही एक दरगाह है जो हजरत सय्यद शाह की है |
इस दरगाह के अनदार कुरआन की आयते लिखी है और कहा जाता है इस पर पानी डालकर पीने से मन की मुराद पूरी होती है | इस मस्जिद के पिछले हिस्से में जाकर देखने पर गोमती नदी दिखती है जिसे पहले पूरे लखनऊ में घूमकर बहने के कारन घूमती नदी कहते थे और साथ ही दीखता है इसका पुल इस पुल पर मीनारे बनी हुई है इन मीनारों का इस्तेमाल यहाँ आने वाली बाढ़ को देखने के लिया किया जाता था इसे लाल पुल कहते है और अब इसे पक्का पुल कहते है |

टीले वाली मस्जिद के अन्दर का द्रश्य

इस मस्जिद से निकल कर हम बढे पुराने लखनऊ की तरफजहा आपको सामने देखने पर मिलता है रूमी दरवाजा जो एक ज़माने से अपने अन्दर तहजीब और इतिहास को छुपाये खड़ा हुआ है | पुराने समय में इसका इस्तेमाल सुरक्षा की द्रष्टि से बहुत अधिक था इस दरवाजे के ऊपर बनी मीनार पर सिपाही कहदे होकर चारो तरफ ५-५ किलो मित्रे तक देख सकते थे और उन्हें यदि कोई दुश्मन आता दिखाई देता था तो वाही से झंडा दिखाकर इसकी जानकारी अपने सिपह्यियो को देते थे |
इस दरवाज़े के पास ही है बार इमामबारा गाइड नवेदजी ने बाते की इमामबारा कोई एताहसिक्क ईमारत नहीं है बल्कि ये एक धार्मिक ईमारत है इमामबारा का इस्तेमाल सिर्फ जिक्र (religious meeting ),मज्लिश (condolence meeting) ,या महफ़िल के ;लिए किया जाता था इमामबारा लखौरी इतो और गारा का बना हुआ है और लगभग २५० वर्षो से खड़ा हुआ है| इमाबारे के पिछले हिस्से से निकलते हुए हम बढ़ते है गोल दरवाज़े की और यहाँ रास्ते में हमे फूलो की मंदी मिली जहा बहुत प्रकार के फूलो की थोक बिक्री होती है गोल दरवाज़े पर पहुचने पर हमे मिलती है पहलवान जी की ठंडे की दूकान जो की लगभग सौ सालो से चल रही और यहाँ बहुत ही स्वादिष्ट ठंडे मिलती है |यही है एक पुराण अमा कलि का मंदिर कहा जाता है की यहाँ मांगी जाने वाली हर इच्छा पोरी होती है | इस मंदिर की ख़ास बात है ये मंदिर छोटा है मगर यहाँ के लोगो की इसमें बड़ी श्रद्धा है और यहाँ पुरुष की जगह एक महिला पुजारी है |
कल्ली  रामजी का मंदिर में लगी राम दरबार की प्रतिमा
यहाँ से आगे बढ़ने पर है काली राम जी का मंदिर इस मंदिर में सवाले राम की प्रतिमा है और यहाँ राम दरबार की जो प्रतिमा है उसमे सीताजी की स्थान मध्य में है जिस कारन से यह विस्वा का एकलौता ऐसा मंदिर है जिसमे राम दरबार की एक अलग छवि दिखाती है | यहाँ से कुछ दूरी पर है किंग यूनानी अस्पताल इस अस्पताल में आज भी यूनानी विधि से दवाओ का निर्माण स्वतः किया जाता है और हर प्रकार के रोग का इलाज़ किया जाता है | इस अस्पताल की देख रेख चंदे के द्वारा होती है ये मुफ्त इलाज प्रदान करते है |
यूनानी अस्पताल से हम आगे बढ़ते है फिरंगी कोठी की तरफ ये कोठी फिरंगियों को नवाब वाजिद अली शाह ने दी थी ये लोग यहाँ पर नील और घोड़ो का व्यापार करते थे और इस कोठी के पास ही है कप्तान का कुआ हलकी इस कुए के उपसर अब एक दूकान बन गई है जिसमे आज चिकन के कपरो का कारोबार होता है | इसके आगे एक कोठी है जहा हमारी मुलाक़ात नुझात जी से हुई जिन्होंने बताया की इस महल में वो अपने परिवार की १२वि पुश्त है और इसी इ महल में गांधीजी ,सरोजनी नायडू और अन्य लोगो आजदी की जुंग के लिए मीटिंग की थी , उन्होंने बाते की गाँधीजी सिर्फ दो बार लखनऊ ए थे और दोनों बार उन्ही के महल में रहे थे साथ ही उन्होंने वो जगह भी दिखाई जहा आजादी की मीटिंग हुई थी जो की एक तह खाने जैसी जगह थी यहाँ से आगे बढ़ने पर सकरी गली है और इस गली में दोनों तरफ फूलो की दुकाने है इन्ही की वजह से इस गली का नाम है फूलो वाली गली इस गली में मिलने वाले फूलो का इस्तेमाल पुराने ज़माने में दो तरह से होता था एक तो इस गली में मंदिर बहुत है और लोग मंदिर में चड़ने के लिए यहाँ से फूल खरीदते थे और दोस्सरा यही पास में मुजरा करने वाली रहती थी जिनसे मिलने वाले लोग भी उनके लिए फूल लेकर जाते थे इसी संकरी गली से आगे बढ़ने पर शुरात होती है यहाँ के तोलो की और इन्ही तोलो में से एक टोला है कटारी टोला इसे छोटी कशी भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ बहुत सारे छोटे बड़े मंदिर है और साथ ही विस्वनाथ जी का भी मंदिर है यहाँ से आप पुराने जमने की टोला व्यवस्था को समझ सकते है जहा हर तोले में दो गाते होते थे और इनके बंद होते है पूरा टोला बंद हो जाता था और साथ ही हर एक तोले में एक ही तरह का काम करने वाले के लोग रहते थे इन तोलो के गाते तो छोटे होते है मगर अन्दर से ये बहुत बड़े होते है इसी प्रकार इनकी कोठिया भी होती थी जिनके दरवाज़े छोटे छोटे होते है मगर अन्दर से कोठी बहुत विसाल होती है इन तोलो में बहुत सी पुराणी इमारते भी है और बहुत सी नयी भी बन गई है मगर भव्यता की कहानी इनकी पुराणी इमारते आज भी कहते है इन के ऊपर एक लाइन बिलकुल फिट बैठती है " की खंडहर बताता है की महल कभी अलिसान रहा होगा " इन्ही पुराणी कोथोयो में एक है नेपाली कोठी जहा रहने वाले लोग नेपाल से आए थे और फिर यही बस गए और आज भी ये लोग अपना पुस्तानी रोज़गार ही करते है यहाँ से आगे बढ़ने पर हमे मिलता है एक बड़ा मार्केट जहा सुनार और चिका के कपड़ो का व्यापार करने वाले व्यापारियों की दुकाने है इसी के साथ यहाँ आप चांदी कवारक बनाते देख सकते है जिसमे चांदी के छोटे से टुकड़े को हथोडी से पीट पीट कर बढया जाता है और ये हथोडी के आवाज भी अपनी तरह का अलग संगीत पैदा करती है और इसी मार्केट में है एक इतर की दूकान जहा स्वनिर्मित इतर की बिक्री होती है इसके विक्रेता अपने आप इन इतरो का निर्माण फूलो और हेर्ब्स से करते है और जब ये यात्रा करते करते आप थक जाये और आप को जोर की भूख लगे तो यहाँ आप को मिलेंगे कोल्चे जो शुद्ध तरीके से आप के सामने बनते है या आप खा सकते थे पूरे विश्व में प्रसिद्ध तुन्दय के कबाब क्योंकि इसी गली में है असली और सबसे पुराणी तुन्दय कब्बाब की दुकान और इसी के साथ  हमरे ये यात्रा भी समाप्त होती है |




अंत में मई धन्यवाद देना चाहूँगा  हमारे बेच के साथ- साथ हमारे गाइड नवेद, आतिफ और इमरान हाश्मी जी का जिन्होंने हमें  पूरा सहयोग दिया और पुराने लखनऊ को और करीब से देखने समझाने और जीने का मौका दिया |

Tuesday, February 22, 2011

कुछ ख्वाहिशे अधूरी सी .......

आज जिंदगी के पन्नो को पलटने का मन हुआ तो ढेर सारी-अच्छी बुरी यादो के साथ बहुत सारी अधूरी ख्वाहिशे सामने आई और ऐसा मेरे साथ ही नहीं है हर वो इंसान जो इस दुनिया में है कही न कही अधूरी ख्वाहिशो के साथ है| कुछ ख्वाहिशे जो अतीत के पन्नो में दफ़न हो जाती है और कुछ जो हमेशा हमसफ़र बनकर चलती है|
ख्वाहिशो के बारे में एक जुमला जो हमेशा सुनने को मिलता और सुनने में बहुत अच्छा भी लगता है वो ये है की ख्वाहिश वो होती है जो कभी पूरी नहीं होती या कुछ लोग ऐसे भी कहते है की जो पूरी हो जाये वो ख्वाहिश ही क्या .. सुनने में ये लाइन अची लगती है अक्सर लोग इन्हें सुनकर भावुक भी हो जाते है और हमे अपनी अधूरी ख्वाहिशो के न पूरा होने का मलाल भी दिल से निकल जाता है |
हर इंसान की तरह बचपन से ही मेरे दिल में भी हजारो ख्वाहिशे रही है और इन्ही ख्वाहिशो के साथ मई अपनी जिंदगी का सफ़र तय कर रहा हूँ |
ख्वाहिशो के बारे में जो सबसे अची बात है वो ये है की अधूरी ख्वाहिशे जितना गम देती है नयी ख्वाहिशे उतनी ही ख़ुशी देती है हौसला भी बढातीख्वाहिशे ही मंजिले दिखाती है ,ख्वाहिशे ही रस्ते दिखाती है और ख्वाहिशे ही  है|
कभी कभी हम अपनी अधूरी ख्वाहिशो को याद करके दुखी हो जाते है लेकिन ये ख्वाहिशे ही है जो हमारी जिंदगी के रास्ते,मंजिले और जिंदगी जीने के तरीके को भी बड़ी ही आसानी से बदल देती है|
ख्वाहिशे भले ही पूरी न हो पर वो कुछ पल या यु कहे की कम से कम जिंदगी के एक पल को तो खुशनुमा कर ही देती है और जिंदगी का हर पल बहुत मायने रखता है और अगर इसी एक पल हम पूरी जिंदगी जी ले तो पूरी   जिंदगी खुशनुमा हो जाएगी वैसे भी जिंदगी का हर एक खुशनुमा पल हमारे मस्तिस्क को हमारे होने का एहसास दिलाता है हमारे काम करने की छमता को बढाता है और जब हम खुश होते है तो हमें अपने आस-पास  के माहौल में भी ख़ुशी दिखती है और हम भी अपने आस-पास ख़ुशी का माहौल भी पैदा करते है |
वैज्ञानिको का कहना भी यही है की जब आप खुश होते है तो आपके शरीर से एक पोजीटिव एनेर्जी निकलती है जो आप के आस-पास की चीजो को भी पोजीटिव करते है आपके आस-पास की चीजो में परिवर्तन होता है और वो भी पोजीटिव रिस्पोंस देना शुरु करती  है ,और  फिर कही न कही ये आपकी जिंदगी में भी पोजीटिव बदलाव करती है  ,बस सोच पोजीटिव होनी चाहिए |
जब कुछ पोजीटिव होगा तो थोड़ी बहुत नेगतीवे चीजे भी होगी ही क्योंकि विज्ञानं ही ये भी बताती है की पोजीटिव ही हमेशा निगातिव को आकर्षित करता है लेकिन अगर हम अपना ध्यान सिर्फ पोजीटिव पर केन्द्रित करे तो जिंदगी जरुर खुशनुमा होगी |
तो जिंदगी को आसान बनाने का सबसे अच्छा तरीका है ख्वाहिश करे उस पर फोकस करे आपके शरीर से पोजीटिव एनेर्जी निकलेगी इसी एनेर्जी के साथ आगे बढे चीजो को बदलने की कोशिश करे ,खुद पर भरोसा करे जिंदगी जरूर बदलेगी ख्वाहिशे भी पूरी होगी और खुशिया भी मिलेंगी| 

Friday, February 11, 2011

जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा

जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा ,
अपनी आँखों से तेरा ख्वाब नहीं देखा ,
देखि तेरी आँखों में खुशियों की चमक ,
पर तुने मेरी आँखों से बहता गम नहीं देखा ,
तेरी रहो में बीचे कटे हटाते हटाते मैंने अपने हाथो से बहता लहू देखा ,
जब भी सोचा जिंदगी को वापस पटरी पर लाऊ ,
मैंने दूर दूर तक सिर्फ बंजर जमी को देखा ,
हर पल तन्हाई में खुद को अपनी उलझनों से लड़ते देखा,
जो देखने की तम्मना थी वो नहीं देखा,
जो नहीं देखना था वो हर पल देखा,
न जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा ,
देखा तो सिर्फ अपनी आँखों में दम तोड़ते अपने ख्वाबो को देखा,
दो कदमो का फासला था सिर्फ हममे ,
पर तुमने एक बार भी पलटकर नहीं देखा,
मंजिलो और रास्तो के भंवर में फंसकर मेरे कदमो को मेरा साथ छोड़ते देखा,
हर आहट को तेरी आहट समझ मैंने हर बार पलट कर देखा,
तेरे साथ चलने के अपने वाडे की याद में मैंने मेरी बहू में सिमटा गम का समंदर भी नहीं देखा,
जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा|

Monday, February 7, 2011

अब पुस्तकों से कैसी दूरी

 अब पुस्तकों से कैसी दूरी
लखनऊ ,७ फरवरी : लखनऊ विश्वविद्यालय के टेनिस ग्रौंड  में नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से आयोजित पुस्तक मेला ५  फरवरी से शुरू हो चूका है | यहाँ हर उम्र वर्ग के लोगो के लिए पुस्तकों की भरमर है बच्चो की मनोरंजक पुस्तके,युवाओं के लिए सिक्षापरक पुस्तके और बड़ी उम्र के लोगो के लिए सहितियक पुस्तके और अन्य कई प्रकार की पुस्तके भी उपलब्ध है|
नेशनल बुक ट्रस्ट और लखनऊ विश्वविद्यालय  के सहयोग से आयोजित इस पुस्तक  मेले में ११५ प्रकाशक हिस्सा ले रहे है | यहाँ १६२ एस्ताल्ल बनाये गए है जो १३ फेबुरारी तक सुबह ८ बजे से रात के १० बजे तक ग्राहकों के लिए खुले रहेंगे |
यही नहीं यहाँ हर स्टाल पर आप को प्रकाशकों तरफ से १० प्रतिशत की छूट मिलेगी वाही कुछ प्रकशक २५ और कुछ ५० प्रतिशत तक की छूट भी दे रहे है | मेले में ८ रुपये से लेकर ५००० रुपये तक की पुस्तके उपलब्ध है | हलाकि किताबो का औसत मूल्य २५ रुपये से ४०० रुपये के बीच  है |
अलग अलग प्रकाशकों द्वारा अलग अलग प्रकार की पुस्तके हर वर्ग के लिए उपलब्ध है | यहाँ ओउत्लूक ग्रुप इंडिया की पुस्तके, चर्रो वेदों का हिंदी भाष्य जो की आर्य प्रकाशन नयी दिल्ली की और से उपलब्द्ध है साथ ही रूसी पुस्तके , रापिदेक्स कोउर्सेस पुस्तक महल की और से ,ओशो सिर्क्ले फ़ौन्दतिओन की और से ओशो की सभी किताबे , साथ ही बछो की मनपसन्द दिअमोंद कॉमिक्स की कॉमिक्स , कई प्रकार की pratiyogi parikshayo के लिए pratiyogita sahitya series की पुस्तके ,साथ ही डेल्ही प्रेस विश्व बुक्स के स्टाल पर वैदिक पुस्तके, महिलायों की पुस्तके बच्चो के लिए मनोरंजक ज्ञानवर्धक और द्रविंग बुक्स भी उपलब्ध है साथ ही मुस्लिम कम्युनिटी के लिए अल हसनत बुक्स प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा उर्दू की पुस्तकों का बड़ा संग्रह उपलब्ध है इसी के साथ एक cd स्टाल है जहा मुस्लिम कम्युनिटी से सम्बंधित बहुत cd और dvd उपलब्ध है | साथ ही बन्दूको के बार्रे में जानकारी चाहने वाले लोगो के लिए कविता पुब्लिशेर्स एंड देस्त्रिबुतार्स की तरफ बन्दूको से सम्बंधित कई मागज़ीने और पुस्तके उपलध है |
जहा इस पुस्तक मेले में इतनी विविध प्रकार की पुस्तके उपलब्ध है वाही पाठको की कमी नजर आती है कई स्टाल पर बैठे हुए उनके मालिको से बात करने पर पता चला की बिक्री बहुत ही कम है कुछ ने कहा उनका यहाँ तक आने का खर्चा भी नहीं निकल रहा है अमर स्वामी प्रकाशन विभाग गाजियाबाद के मालिक लाजपत राइ अग्रवाल जी ने बताया की यहाँ दर्शक ज्यादा और पाठक कम है उन्होंने बताया की उनके पास बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक पुस्तके है जैसे गाँधी हत्या क्यों और कैसे इस पुस्तक में नत्थू राम गोंडसे द्वारा गाँधी हत्या और उस से जुड़े तथ्यों जैसे की उस हत्या की फिर की कॉपी उसमे इस्तेमाल हुई पिस्टल की फोटो आदि देकर विस्तार से इस पर बात की गई है उन्होंने साथ ही कहा की इस से pahle वह बिहार और साउथ गए थे और यहाँ की आपेशा वहा पुस्तक प्रेमी आधिक है| इसी के साथ लाजपत राइ अग्रवाल जी के द्वारा एक जानकारी और दी गई है की उनके स्टाल पर श्री स्वामी कल्याण देव जी महाराज आयुर्वेद संबधित इलाज के बार्रे में जानकारी देने के लिए उपस्थित है |
इसी के साथ ही एक बुक स्टाल पर cd और dvd के रूप में बुक्स और सोफ्त्वारेस उपलब्ध है कुछ स्टाल्स पर बच्चो के खेलने की वस्त्यो के साथ ही द्रविंग बुक्स भी उपलब्ध है|

Thursday, February 3, 2011

जिंदगी में स्पीड ब्रेकर

जिंदगी बहुत तेजी से भागती है लेकिन जिंदगी भी उसी एक सड़क की तरह है जिसमे जगह जगह पर चालक को संतुलित करने के लिए स्पीड ब्रेअकेर्स होने भी जरुरी होते होते है .ये ख्याल आज मुझे उस वक़्त आया जब मै अपनी बाइक को drive करते हुए एक स्पीड ब्रेअकर से गुजरा और बहुत सोचने के बाद में मेरे दिल में जो ख्याल आया वो ये था की "मेरे सोचने के तरीके से जिंदगी के स्पीड ब्रेअकर कभी स्पीड को कम नहीं करते बस थोड़ी देर के लिए हमारा ध्यान बटाते है ,कुछ सिखाते है और ,फिर जिंदगी दोबारा और तेजी से चलने लगती है ;बसरते सार्रे कण्ट्रोल हम हमेशा अपने हाथ में रखे तो |"

Thursday, January 27, 2011

मेरा पत्र मेरी जिंदगी को..........

 मेरी जिंदगी आज मै मेरे गुरु श्री मुकुल श्रीवास्तव जी की प्रेरणा से तुम्हे यह ख़त लिख रहा हू |
मै  सौमित्र  यह नाम मुझे मेरे माता पिता ने दिया और इसी के साथ तुम्हारे साथ मेरे सफ़र की शुरुआत हुई एक आम आदमी की तरह ही मैंने भी तुम्हे जीना शुरू किया और अभी तक मै एक आम ही आदमी  हूँ |
जब भी मै इस जिंदगी के बार्रे में सोचना शुरू करता हू मुझे अपनी जिंदगी के अच्छे बुरे जो भी पल जिए मुझे याद आते है हर आम आदमी की तरह ही तुमसे मुझे जो भी मिला कभी मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया और कभी बहुत ख़ुशी भी हुई की मेरे साथ मेरे आस पास रहने वाले लोगो मेरे दोस्तों और मुझसे जुड़े और लोगो से मै कुछ ज्यादा पा रहा हूँ तुमसे मुझे तुमसे बहुत साडी शिकायते भी है तो बहुत सारी खुशिया जो तुमने मुझे दी उसके लिए मै तुम्हारा धन्यवाद भी देना चाहता हूँ आज तुम्हे ये पत्र लिख कर मै अपनी बीती हुई जिंदगी को तुम्हारे साथ एक बार फिर से जीना चाहता हूँ मै आज उस हर खूबशूरत लम्हे को एक बार फिर से जिन्दा करने की कोशिश करूँगा जो तुमने मुझे दिया और साथ हे आपनी उस हर गलती के बारे में भी थोडा सा सोचूंगा और कोशिश करूँगा उन सभी का हल निकलने की ताकि आने वाले मेरे भविष्य में मुझे दोबारा उन मुसीबतों का सामना न करना पड़ा जिनका मै अपने गुजरे हुए कल में कर चूका हू मै नहीं चाहता की दुबारा मुझे तुमसे कभी ये कहना पड़े की तुमने मुझे ये दिन फिर क्यों दिखाया |
मैंने अपने सफ़र की शुरुआत एक छोटे से शहर से की जहा मेरा बचपन बहुत ही मीठी यादो के साथ और कुछ कडवे पलो के साथ कटा| उम्र के एक बड़े हिस्से तक मुझे इस सफ़र के बारे में ज्यादा अहसास नहीं था बस बिना किसी फ़िक्र के मै तुम्हारा हाथ थाम कर आगे बढ़ रहा था तुम्हारे साथ साथ मेरे माता पिता ने भी मेरा हाथ बड़ी ही मजबूती के साथ थमा हुआ था जिस से जिंदगी के सफ़र का एक बड़ा हिस्सा कब ख़तम हुआ मुझे पता भी नहीं चला या मै जिंदगी का एक पड़ाव था जो एक आम आदमी की ही तरह मेरी जिंदगी में भी आया और ख़तम हो गया और जाते जाते मुझसे कह गया की यहाँ तक ke सफ़र में हमने तुम्हारे हर फैसले को तुम्हारे लिए सोचा और किया अब तुम्हारी बारी है अब आगे का सफ़र तुम्हे अकेले अपने आप से करना है हम साथ है हम तुम्हारे लिए सोचते है और हर कठिनाई में तुम्हारा मार्गदर्शन करेंगे मगर अब फैसले तुम्हे खुद लेने होंगे और अपने रास्ते भी तुम्हे खुद तय करने होंगे अब अपने हर फैसले के jimedar तुम खुद होगे ये vo vakt था जब मै अपने  school के dino को पूरा कर चूका था और अपने garduation के लिए अपने छोटे शहर से निकल कर आँखों में ढेर saare sapne और purani याद लिए  एक बड़े शहर में आ गया |
इस नए शहर में आने के पहले की सारी यादे आज भी मेरे जेहन में बसी हुई है और हमेशा यही लगता है की वो दिन आज के दिन से ज्यादा खूब्शुरुत थे |
मगर जिंदगी के सफ़र का ये हिस्सा ही असली सफ़र था जिसमे मै और सिर्फ मै था अपना हर दिन मुझे अपने हिस्साब से जीना था मेरी जिंदगी के सारे नियम कायदे सब मुझे बनाने थे शुरू में तो बहुत अच्छा लगा आजादी देख कर मगर जैसे जैसे सफ़र आगे बढा और रस्ते की मुशिकलो ने मुह उठाना शुरू किया तो महसूस होना शुरू हुआ जो सफ़र मै कर रहा हूँ वो नहीं बल्कि जो मै कर चूका हू वो ज्यादा अच्छा था वहा मेरी हर जरुरत और हर समस्या के लिए मेरे अपने सोचते थे मुझे रस्ते के किसी भी कांटे की परवाह नहीं करनी होती थी सबके लिए मेरे अपने मेरा साथ देते थे मै सिर्फ तुम्हे एन्जॉय कर रहा था मगर अब वक़्त बदल चूका था अब हर चीज़ के लिए मुझे खुद सोचना था यही से मेरी असली जिंदगी शुरू हुई इस सफ़र में भी मुझे बहुत से अपने और अगर दूसरी तरह से कहे तो हमसफ़र मिले जिन्हें ने बखूबी मेरा साथ दिया मगर उनमे से कोई भी ज्यादा दूर तक मेरे साथ नहीं चल सका और इसमें उनकी खता भी नहीं है हर सख्स का अपना अपना सफ़र है जो उसे तय करना है मै अपना कर रहा हूँ और उन्हें अपना करना है और मै अपना कर रहा हूँ इन साथियों के लिए मै दो लाइन कहना चाह्होंगा जो अक्सर मेरे जेहन में आती है
आंसू बन कर आंख पर आ भी नहीं सकता,गम क्या है समुन्दर को बता भी नहीं सकता;
तुम मेरा साथ छोड़ रहे हो इसमें तुम्हारी खता नहीं ,हर शख्स मेरा साथ निभा भी नहीं सकता |
वो सारे लोग जो इस पड़ाव पर मेरे साथ ए और चले गए मुझे हमेशा याद रहेंगे क्यूंकि उन्होंने हमेशा मुझे कुछ न कुछ दिया किसी ने मीठी यादे दी तो किसी ने सिखाने के लिए एक्स्पेरिंस दिए.
इस पूरे सफ़र मै कई बार उदास भी हुआ कई बार निराश भी कई बार ख़ुशी भी हुई और कभी गम से आंख भी भर आई
आज भी मै चल रहा हू और न जाने अभी मुझे कितना और चलना भी है मगर ऐ जिंदगी मेरा ये तुम से वादा है की जब तक तू मेरा दम्मान नहीं चोदगी मै भी रोज नयी उमंग और रोज़ नए जोश के साथ तुझसे सीखता हुआ आगे बढ़ता रहूँगा तेरे हर पल को जितना ज्यादा हो सकेगा जिऊंगा न निराश होऊंगा और न तुझे निराश करूँगा|
बस जो एक सच आज मै आज तक नहीं समझ पाया हूँ वो ये है की मै तुम्हे जी रहा हूँ या तुम मुझे ..........
    इस पत्र को पढने के बाद तुम्हारे जेहन में एक बात जरुर आयेगी की इसमें कुछ अधूरा है मगर क्या करू अभी मै और मेरी जिंदगी दोनों अधूरे है......