जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा ,
अपनी आँखों से तेरा ख्वाब नहीं देखा ,
देखि तेरी आँखों में खुशियों की चमक ,
पर तुने मेरी आँखों से बहता गम नहीं देखा ,
तेरी रहो में बीचे कटे हटाते हटाते मैंने अपने हाथो से बहता लहू देखा ,
जब भी सोचा जिंदगी को वापस पटरी पर लाऊ ,
मैंने दूर दूर तक सिर्फ बंजर जमी को देखा ,
हर पल तन्हाई में खुद को अपनी उलझनों से लड़ते देखा,
जो देखने की तम्मना थी वो नहीं देखा,
जो नहीं देखना था वो हर पल देखा,
न जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा ,
देखा तो सिर्फ अपनी आँखों में दम तोड़ते अपने ख्वाबो को देखा,
दो कदमो का फासला था सिर्फ हममे ,
पर तुमने एक बार भी पलटकर नहीं देखा,
मंजिलो और रास्तो के भंवर में फंसकर मेरे कदमो को मेरा साथ छोड़ते देखा,
हर आहट को तेरी आहट समझ मैंने हर बार पलट कर देखा,
तेरे साथ चलने के अपने वाडे की याद में मैंने मेरी बहू में सिमटा गम का समंदर भी नहीं देखा,
जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा|
अपनी आँखों से तेरा ख्वाब नहीं देखा ,
देखि तेरी आँखों में खुशियों की चमक ,
पर तुने मेरी आँखों से बहता गम नहीं देखा ,
तेरी रहो में बीचे कटे हटाते हटाते मैंने अपने हाथो से बहता लहू देखा ,
जब भी सोचा जिंदगी को वापस पटरी पर लाऊ ,
मैंने दूर दूर तक सिर्फ बंजर जमी को देखा ,
हर पल तन्हाई में खुद को अपनी उलझनों से लड़ते देखा,
जो देखने की तम्मना थी वो नहीं देखा,
जो नहीं देखना था वो हर पल देखा,
न जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा ,
देखा तो सिर्फ अपनी आँखों में दम तोड़ते अपने ख्वाबो को देखा,
दो कदमो का फासला था सिर्फ हममे ,
पर तुमने एक बार भी पलटकर नहीं देखा,
मंजिलो और रास्तो के भंवर में फंसकर मेरे कदमो को मेरा साथ छोड़ते देखा,
हर आहट को तेरी आहट समझ मैंने हर बार पलट कर देखा,
तेरे साथ चलने के अपने वाडे की याद में मैंने मेरी बहू में सिमटा गम का समंदर भी नहीं देखा,
जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा|
चलिए एक नए लेखक की लेखनी से कविता निकली भाव हैं पर ठीक से निकले नहीं है फिर से एक बार लिखने की कोशिश करो
ReplyDelete"जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा
यूँ तो सब कुछ है जीवन में
पर वो हँसता मुस्कुराता आसमान नहीं देखा
युग बीते यूँ ही तारों को देखे हुए
जीवन के खाली पन में अपने आपको परखे हुए
जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा"
मेरी रचना के बारे में आपका क्या ख्याल है इसका इन्तिज़ार रहेगा फेसबुक पर इसको दाल रहा हूँ
हाँ अपने ब्लॉग का बैक ग्राउंड बदलो सही पढ़ने में नहीं आता है इसे प्लेन ही रखो तो बेहतर होगा
अंत में मेरी टिप्पड़ियों से हताश मत होना बल्कि दुगुनी मेहनत से फिर से लिखना
bht accha likha hai saumitra..!!
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