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Tuesday, February 22, 2011

कुछ ख्वाहिशे अधूरी सी .......

आज जिंदगी के पन्नो को पलटने का मन हुआ तो ढेर सारी-अच्छी बुरी यादो के साथ बहुत सारी अधूरी ख्वाहिशे सामने आई और ऐसा मेरे साथ ही नहीं है हर वो इंसान जो इस दुनिया में है कही न कही अधूरी ख्वाहिशो के साथ है| कुछ ख्वाहिशे जो अतीत के पन्नो में दफ़न हो जाती है और कुछ जो हमेशा हमसफ़र बनकर चलती है|
ख्वाहिशो के बारे में एक जुमला जो हमेशा सुनने को मिलता और सुनने में बहुत अच्छा भी लगता है वो ये है की ख्वाहिश वो होती है जो कभी पूरी नहीं होती या कुछ लोग ऐसे भी कहते है की जो पूरी हो जाये वो ख्वाहिश ही क्या .. सुनने में ये लाइन अची लगती है अक्सर लोग इन्हें सुनकर भावुक भी हो जाते है और हमे अपनी अधूरी ख्वाहिशो के न पूरा होने का मलाल भी दिल से निकल जाता है |
हर इंसान की तरह बचपन से ही मेरे दिल में भी हजारो ख्वाहिशे रही है और इन्ही ख्वाहिशो के साथ मई अपनी जिंदगी का सफ़र तय कर रहा हूँ |
ख्वाहिशो के बारे में जो सबसे अची बात है वो ये है की अधूरी ख्वाहिशे जितना गम देती है नयी ख्वाहिशे उतनी ही ख़ुशी देती है हौसला भी बढातीख्वाहिशे ही मंजिले दिखाती है ,ख्वाहिशे ही रस्ते दिखाती है और ख्वाहिशे ही  है|
कभी कभी हम अपनी अधूरी ख्वाहिशो को याद करके दुखी हो जाते है लेकिन ये ख्वाहिशे ही है जो हमारी जिंदगी के रास्ते,मंजिले और जिंदगी जीने के तरीके को भी बड़ी ही आसानी से बदल देती है|
ख्वाहिशे भले ही पूरी न हो पर वो कुछ पल या यु कहे की कम से कम जिंदगी के एक पल को तो खुशनुमा कर ही देती है और जिंदगी का हर पल बहुत मायने रखता है और अगर इसी एक पल हम पूरी जिंदगी जी ले तो पूरी   जिंदगी खुशनुमा हो जाएगी वैसे भी जिंदगी का हर एक खुशनुमा पल हमारे मस्तिस्क को हमारे होने का एहसास दिलाता है हमारे काम करने की छमता को बढाता है और जब हम खुश होते है तो हमें अपने आस-पास  के माहौल में भी ख़ुशी दिखती है और हम भी अपने आस-पास ख़ुशी का माहौल भी पैदा करते है |
वैज्ञानिको का कहना भी यही है की जब आप खुश होते है तो आपके शरीर से एक पोजीटिव एनेर्जी निकलती है जो आप के आस-पास की चीजो को भी पोजीटिव करते है आपके आस-पास की चीजो में परिवर्तन होता है और वो भी पोजीटिव रिस्पोंस देना शुरु करती  है ,और  फिर कही न कही ये आपकी जिंदगी में भी पोजीटिव बदलाव करती है  ,बस सोच पोजीटिव होनी चाहिए |
जब कुछ पोजीटिव होगा तो थोड़ी बहुत नेगतीवे चीजे भी होगी ही क्योंकि विज्ञानं ही ये भी बताती है की पोजीटिव ही हमेशा निगातिव को आकर्षित करता है लेकिन अगर हम अपना ध्यान सिर्फ पोजीटिव पर केन्द्रित करे तो जिंदगी जरुर खुशनुमा होगी |
तो जिंदगी को आसान बनाने का सबसे अच्छा तरीका है ख्वाहिश करे उस पर फोकस करे आपके शरीर से पोजीटिव एनेर्जी निकलेगी इसी एनेर्जी के साथ आगे बढे चीजो को बदलने की कोशिश करे ,खुद पर भरोसा करे जिंदगी जरूर बदलेगी ख्वाहिशे भी पूरी होगी और खुशिया भी मिलेंगी| 

Friday, February 11, 2011

जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा

जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा ,
अपनी आँखों से तेरा ख्वाब नहीं देखा ,
देखि तेरी आँखों में खुशियों की चमक ,
पर तुने मेरी आँखों से बहता गम नहीं देखा ,
तेरी रहो में बीचे कटे हटाते हटाते मैंने अपने हाथो से बहता लहू देखा ,
जब भी सोचा जिंदगी को वापस पटरी पर लाऊ ,
मैंने दूर दूर तक सिर्फ बंजर जमी को देखा ,
हर पल तन्हाई में खुद को अपनी उलझनों से लड़ते देखा,
जो देखने की तम्मना थी वो नहीं देखा,
जो नहीं देखना था वो हर पल देखा,
न जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा ,
देखा तो सिर्फ अपनी आँखों में दम तोड़ते अपने ख्वाबो को देखा,
दो कदमो का फासला था सिर्फ हममे ,
पर तुमने एक बार भी पलटकर नहीं देखा,
मंजिलो और रास्तो के भंवर में फंसकर मेरे कदमो को मेरा साथ छोड़ते देखा,
हर आहट को तेरी आहट समझ मैंने हर बार पलट कर देखा,
तेरे साथ चलने के अपने वाडे की याद में मैंने मेरी बहू में सिमटा गम का समंदर भी नहीं देखा,
जाने कितने दिनों से मैंने चाँद नहीं देखा|

Monday, February 7, 2011

अब पुस्तकों से कैसी दूरी

 अब पुस्तकों से कैसी दूरी
लखनऊ ,७ फरवरी : लखनऊ विश्वविद्यालय के टेनिस ग्रौंड  में नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से आयोजित पुस्तक मेला ५  फरवरी से शुरू हो चूका है | यहाँ हर उम्र वर्ग के लोगो के लिए पुस्तकों की भरमर है बच्चो की मनोरंजक पुस्तके,युवाओं के लिए सिक्षापरक पुस्तके और बड़ी उम्र के लोगो के लिए सहितियक पुस्तके और अन्य कई प्रकार की पुस्तके भी उपलब्ध है|
नेशनल बुक ट्रस्ट और लखनऊ विश्वविद्यालय  के सहयोग से आयोजित इस पुस्तक  मेले में ११५ प्रकाशक हिस्सा ले रहे है | यहाँ १६२ एस्ताल्ल बनाये गए है जो १३ फेबुरारी तक सुबह ८ बजे से रात के १० बजे तक ग्राहकों के लिए खुले रहेंगे |
यही नहीं यहाँ हर स्टाल पर आप को प्रकाशकों तरफ से १० प्रतिशत की छूट मिलेगी वाही कुछ प्रकशक २५ और कुछ ५० प्रतिशत तक की छूट भी दे रहे है | मेले में ८ रुपये से लेकर ५००० रुपये तक की पुस्तके उपलब्ध है | हलाकि किताबो का औसत मूल्य २५ रुपये से ४०० रुपये के बीच  है |
अलग अलग प्रकाशकों द्वारा अलग अलग प्रकार की पुस्तके हर वर्ग के लिए उपलब्ध है | यहाँ ओउत्लूक ग्रुप इंडिया की पुस्तके, चर्रो वेदों का हिंदी भाष्य जो की आर्य प्रकाशन नयी दिल्ली की और से उपलब्द्ध है साथ ही रूसी पुस्तके , रापिदेक्स कोउर्सेस पुस्तक महल की और से ,ओशो सिर्क्ले फ़ौन्दतिओन की और से ओशो की सभी किताबे , साथ ही बछो की मनपसन्द दिअमोंद कॉमिक्स की कॉमिक्स , कई प्रकार की pratiyogi parikshayo के लिए pratiyogita sahitya series की पुस्तके ,साथ ही डेल्ही प्रेस विश्व बुक्स के स्टाल पर वैदिक पुस्तके, महिलायों की पुस्तके बच्चो के लिए मनोरंजक ज्ञानवर्धक और द्रविंग बुक्स भी उपलब्ध है साथ ही मुस्लिम कम्युनिटी के लिए अल हसनत बुक्स प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा उर्दू की पुस्तकों का बड़ा संग्रह उपलब्ध है इसी के साथ एक cd स्टाल है जहा मुस्लिम कम्युनिटी से सम्बंधित बहुत cd और dvd उपलब्ध है | साथ ही बन्दूको के बार्रे में जानकारी चाहने वाले लोगो के लिए कविता पुब्लिशेर्स एंड देस्त्रिबुतार्स की तरफ बन्दूको से सम्बंधित कई मागज़ीने और पुस्तके उपलध है |
जहा इस पुस्तक मेले में इतनी विविध प्रकार की पुस्तके उपलब्ध है वाही पाठको की कमी नजर आती है कई स्टाल पर बैठे हुए उनके मालिको से बात करने पर पता चला की बिक्री बहुत ही कम है कुछ ने कहा उनका यहाँ तक आने का खर्चा भी नहीं निकल रहा है अमर स्वामी प्रकाशन विभाग गाजियाबाद के मालिक लाजपत राइ अग्रवाल जी ने बताया की यहाँ दर्शक ज्यादा और पाठक कम है उन्होंने बताया की उनके पास बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक पुस्तके है जैसे गाँधी हत्या क्यों और कैसे इस पुस्तक में नत्थू राम गोंडसे द्वारा गाँधी हत्या और उस से जुड़े तथ्यों जैसे की उस हत्या की फिर की कॉपी उसमे इस्तेमाल हुई पिस्टल की फोटो आदि देकर विस्तार से इस पर बात की गई है उन्होंने साथ ही कहा की इस से pahle वह बिहार और साउथ गए थे और यहाँ की आपेशा वहा पुस्तक प्रेमी आधिक है| इसी के साथ लाजपत राइ अग्रवाल जी के द्वारा एक जानकारी और दी गई है की उनके स्टाल पर श्री स्वामी कल्याण देव जी महाराज आयुर्वेद संबधित इलाज के बार्रे में जानकारी देने के लिए उपस्थित है |
इसी के साथ ही एक बुक स्टाल पर cd और dvd के रूप में बुक्स और सोफ्त्वारेस उपलब्ध है कुछ स्टाल्स पर बच्चो के खेलने की वस्त्यो के साथ ही द्रविंग बुक्स भी उपलब्ध है|

Thursday, February 3, 2011

जिंदगी में स्पीड ब्रेकर

जिंदगी बहुत तेजी से भागती है लेकिन जिंदगी भी उसी एक सड़क की तरह है जिसमे जगह जगह पर चालक को संतुलित करने के लिए स्पीड ब्रेअकेर्स होने भी जरुरी होते होते है .ये ख्याल आज मुझे उस वक़्त आया जब मै अपनी बाइक को drive करते हुए एक स्पीड ब्रेअकर से गुजरा और बहुत सोचने के बाद में मेरे दिल में जो ख्याल आया वो ये था की "मेरे सोचने के तरीके से जिंदगी के स्पीड ब्रेअकर कभी स्पीड को कम नहीं करते बस थोड़ी देर के लिए हमारा ध्यान बटाते है ,कुछ सिखाते है और ,फिर जिंदगी दोबारा और तेजी से चलने लगती है ;बसरते सार्रे कण्ट्रोल हम हमेशा अपने हाथ में रखे तो |"